महालया आज…कल सुबह 6:15 से 10:30 बजे तक कलश स्थापना का सर्वोत्तम समय, पंचमी-षष्ठी एक ही दिन

आश्विन कृष्ण अमावस्या बुधवार को पितृपक्ष के समापन के साथ महालया होगा। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा गुरुवार काे कलश स्थापना के साथ ही शारदीय नवरात्र शुरू होगा। ज्योर्तिवेद विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. राजनाथ झा के अनुसार गुरुवार की प्रात: 6:15 से 10:30 बजे तक कलश स्थापना का सर्वोत्तम और उसके बाद मध्यम समय है। धर्म शास्त्रकार ऋषियों का सनातनी वचन है कि प्रात:काल देवी-देवता का आह्वान और प्रात: प्रात: पूजन और प्रात:काल ही विसर्जन करना चाहिए। ऐसा करनेवालों का माता अवश्य कल्याण करती हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसबार माता का आगमन डोली पर, जबकि विदाई गज पर हो रही है।

 

शक्ति की उपासना में महालया का खास महत्व

शक्ति की उपासना में महालया के दिन का खास महत्व है। नवरात्र में मां दुर्गा के आगमन की पूर्व संध्या पहर साधक माता का अधिवास कराते हैं। महालया की रात्रि बेला में धूप-दीप, नैवेद्य आदि अर्पण कर मां दुर्गा का अधिवास कराया जाता है। इस अनुष्ठान के जरिए भक्त यह कामना करते हैं कि नवरात्र के नौ दिनों का अनुष्ठान निर्विघ्न माता की कृपा व शक्ति से संपन्न हो। तांत्रिक साधक महालया की रात्रि में विभिन्न कल्याणकारी मंत्रों को जागृत कर साधना करते हैं, जिससे जनमानस का कल्याण हो सके। तंत्र मार्ग में भी महालया की रात्रि में कई तरह की पूजा और माता को प्रसन्न करने का विधि-विधान है।

 

अभिजीत मुहूर्त व सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी कलश स्थापना

भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के सदस्य पंडित राकेश झा के अनुसार गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त व सर्वार्थ सिद्धि योग में कलश स्थापना से आरंभ होकर शारदीय नवरात्र 15 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि अाैर रवियोग के युग्म संयोग में संपन्न होगा। माता अपने भक्तों को दर्शन देने डोली पर आ रही हैं। माता के इस आगमन से महिलाओं का वर्चस्व बढ़ेगा और मान-सम्मान में वृद्धि होगी। सभी क्षेत्रों में महिलाओं का जोर होगा। देश की उन्नति व प्रगति में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। लेकिन, महामारी से लोग परेशान रहेंगे। साथ ही माता की विदाई गज पर होना श्रद्धालुओं के लिए शुभ फलकारी होगा।

 

पंचमी अाैर षष्ठी तिथि एक ही दिन

पंचांगीय गणना के अनुसार इस वर्ष शारदीय नवरात्र के दौरान पंचमी अाैर षष्ठी तिथि एक ही दिन पड़ रही है। 11 अक्टूबर को ही माता के पंचम रूप स्कंदमाता और षष्ठम स्वरूप कात्यायनी की पूजा हाेगी। इसी वजह से इसबार दुर्गापूजा 10 की बजाय नौ दिन में ही संपन्न हाेगी

 

Input: Daily Bihar

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