बिहार में मूसलाधार बारिश, डूब गया रेलवे स्टेशन, ट्रेन परिचालन बाधित, फिर गहराया बाढ का संकट

लगातार बारिश से उफनाई बकरा, नूना, घाघी व पहाड़ा नदीसिकटी प्रखंड के 14 पंचायत बाढ़ की चपेट में, गांव के सड़क पर चल रहा 3 से 4 फीट पानी, ऊंचे स्थान पर जाने के लिए लोग ले रहें हैं नाव का सहारा : दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण सिकटी प्रखंड से होकर बहने वाली बकरा, नूना, घाघी, व पहाड़ा नदी में जलस्तर बढ़ने से पूरा सिकटी प्रखंड जल मग्न हो गया है। सड़कों पर तीन से चार फीट पानी का बहाव हो रहा है। लोगों के घरों में पानी घुस जाने से लोग ऊंचे स्थानों पर नाव के सहारे जा रहे हैं। लोगों में त्राहिमाम की स्थिति है। चारों तरफ पानी हीं पानी नजर आ रहा है। बकरा व घाघी नदी से पीरगंज डैनिया, तीरा खारदह, पडरिया, नेमुआ, पिपरा सतवेर, ठेंगापुर, कौआकोह, रामनगर, ढेंगरी पोखरिया, बैरगाछी, करहबाडी बेंगा, डेढुआ, बरदाहा आदि गांव पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। इन गांव के सड़कों पर तीन से चार फीट पानी का बहाव हो रहा है।

 

 

 

कौआकोह पंचायत के पड़रिया गांव से लोग उंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं। डैनिया गांव में आठ परिवारों का घर बकरा नदी में समा गया है वहीं किसानों का सारा धान की फसल डूब गया है। पानी के तेज बहाव के कारण लोगों का कच्चा घर ध्वस्त हो गया। वहीं नूना व पहाड़ा नदी से सैदाबाद, दहागमा, पड़रिया, सालगुडी, कचना, कठुआ, बांसबाड़ी, रानीकट्टा, सिघिया, खोरागाछ, औलाबाडी, बगुलाडांगी, सोमवारी चौक खोरागाछ आदि दर्जनों गांव में जल प्रलय की स्थिति उत्पन्न हो गयी है।

 

 

 

 

एसडीओ व सीओ ने लिया जायजा, कहा- जांच रिपोर्ट सौंपने का दिया गया है निर्देश इधर एसडीओ शैलेश चंद्र दिवाकर, बीडीओ राकेश कुमार ठाकुर व सीओ विरेंदर कुमार सिंह बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा ले रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि सिकटी प्रखंड के लगभग सभी पंचायतों में बाढ़ की स्थिति काफी खराब है। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपने की बात अधिकारियों ने कहीं है।

 

 

ग्रामीण बोले, ऐसी बाढ़ 1987 व 2017 में भी नहीं आई थी ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा बाढ़ वर्ष 1987 व 2017 में भी नहीं आया था। इस बार सिकटी प्रखंड का सभी 14 पंचायतों में बाढ़ का पानी घुस गया है। सड़कों पर तीन से चार फीट पानी चलने के कारण अवागमन पूरी तरह से ठप हो गया। पानी के तेज बहाव के कारण दर्जनों जगहों पर सड़कें ध्वस्त हो गई हैं। सड़कों पर तीन से चार फीट पानी रहने के कारण ध्वस्त सड़कों का पता नहीं चल पा रहा है। दर्जनों विद्यालय, सामुदायिक भवन आदि सरकारी भवनों में पानी घुसा हुआ है। सबसे ज्यादा क्षति किसानों की धान व सब्जी की फसल का हुआ है। बाढ़ के पानी में डूब जाने के कारण किसानों का सारा फसल बर्बाद हो गया है।

 

 

Input: Daily Bihar

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