16000 फीट उपर -30 डिग्री ठंड में भारतीय जवानों ने मनाया छठ पूजा, लेह के पैंगोंग नदी में दिया अरघ

छठ पूजा को लेकर भारतीय फौज में भी गजब का उत्साह देखा गया। बताया जाता है कि इस साल क लेह लद्दाख में भी जवानों ने छठ पूजा का आयोजन किया। 16000 फीट उपर माइनस 30 डिग्री ठंड में पैंगोग नदी में छठ महरानी को अरघ दिया गया।

 

 

 

 

आर्मी के रिटा. जवान की अटूट आस्था, 14 घंटे नदी में रहे फिर उगते सूरज को अर्पित किया जल : छठ पूजा के मौके पर अलग-अलग राज्यों में लाखों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई. छत्तीसगढ़ में भी छठ पूजा का पर्व धूमधाम से मनाया गया. देशभर मे श्रद्धालुओं ने छठ पर्व पर अपने-अपने शहर की नदियों और जलाशयों मे कल यानी बुधवार की शाम डूबते सूरज के साथ ही आज सुबह उगते सूरज को जल अर्पित किया और सूर्य और छठी मईया के उपासना का पर्व छठ मनाया. वही, मनेन्द्रगढ जिले मे छठ पर्व के दौरान एक कठिन साधना का नजारा देखने को मिला. यहां आर्मी से रिटायर एक युवा ने पानी मे डूबकर 14 घंटे तक उस सूरज के उगने का इंतजार किया. शाम को डूबा सूरज जब सुबह फिर दिखा तो उन्होंने सूर्य देवता को जल चढ़ाकर अपने 36 घंटे के उपवास को तोड़ा.

 

 

 

 

18 साल आर्मी में रहे अनूप ओझा

मनेन्द्रगढ़ के नदीपारा इलाके के रहने वाले अनूप ओझा 38 साल के हैं. 18 साल फौज में नौकरी करने के बाद अनूप डेढ़ साल पहले आर्मी की नौकरी से रिटायर हो चुके हैं. अनूप बुधवार की शाम डूबते सूरज को अर्क देने के बाद नदी से बाहर ही नहीं निकले. अनूप शाम को पानी में उतरे और करीब 14 घंटे बाद आज सुबह उगते सूरज को जल अर्पित करने के बाद ही नदी से बाहर निकले.

 

गौरतलब है कि आर्मी की नौकरी से रिटायर होने के बाद अनूप ने पिछले साल पहली बार छठ का व्रत रखा था. पहली बार ही उन्होंने इस व्रत को मौन रखा था. दरअसल छठ सूर्य उपासना और छठी माता की उपासना का पर्व है. इस पूजा में छठी मैय्या के लिए व्रत किया जाता है. ये पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से शुरू होता है. जो पंचम तिथि पर खरना और षष्ठी पर छठ पूजा और सप्तमी तिथि पर सूर्य अर्घ्य के बाद पूरा होता है.

 

 

 

Input: Daily Bihar

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