प्लास्टिक-कांच जैसे कचरे से हो रही है हर महीने 1.50 लाख रु की कमाई, 300 लोगों को रोजगार भी मिला

घरों से निकलने वाला कचरा आज के समय में बड़ी समस्या बनता जा रहा है. ज़मीन के साथ साथ इस कचरे ने तो नदियों तालाबों और समुद्र को भी दूषित कर रखा है. इन सबमें सबसे ज्यादा खतरनाक है वो कचरा जिसे नष्ट होने में सैकड़ों साल लग जाते हैं. जैसे कि प्लास्टिक को नष्ट होने में 70 से 450 साल लगते हैं.

वहीं कांच को नष्ट होने में एक लाख वर्षों का समय लगता है. इस तरह के कचरे का जमा होना प्रकृति के साथ साथ हमारे लिए भी नुकसानदायक है. ऐसे में इनसे छुटकारा पाने का सरल उपाय है, इन्हें उपयोग में लाना. ठीक उसी तरह जिस तरह राजस्थान के जोधपुर में इस कचरे का उपयोग किया जा रहा है.

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अगर आपको बताया जाए कि घर से निकलने वाले कचरे से ड्राई फ्यूल या कोल बनाया जाता है तो आप जल्दी इस बात पर विश्वास नहीं करेंगे लेकिन जोधपुर नगर निगम इस बात को सच साबित कर रहा है. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार जोधपुर में नगर निगम ने एक प्रोजेक्ट की शुरुआत की है.

इस प्रोजेक्ट में हर महीने कचरे से 900 टन आरडीएफ यानि रियूज ड्राई फ्यूल बनाया जा रहा है. तैयार होने के बाद यह आरडीएफ सीधा सीमेंट फैक्ट्रियों को बेचा जा रहा है. हम जिस कचरे को फेंक देते हैं उस कचरे से नगर निगम रोजाना डेढ़ लाख रुपए तक की रकम कमा रहा है. जोधपुर में ऐसे तीन प्लांट लगे हैं.

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नगर निगम के हेल्थ ऑफिसर सचिन मौर्या के मुताबिक जोधपुर शहर में हर रोज 500 टन कचरा निकलता है. इसमें से 250 टन कचरा प्लास्टिक, गत्ते, कागज, कांच की बोतलें आदि जैसा ड्राई वेस्ट के रूप में जमा होता है. अब इस ड्राई वेस्ट से ड्राई फ्यूल तैयार किया जाने लगा है. यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट (यूएनडी) प्रोग्राम के तहत रिकार्ड इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी इस प्रोजेक्ट को चला रही है. सचिन मौर्या ने बताया कि जोधपुर उन 30 शहरों में से एक है जिन्हें इस प्रोजेक्ट के तहत चुना गया था. जोधपुर नगर निगम ने अपने तीन प्लांट्स में 75 लाख रुपए की मशीनें लगाई गई हैं.

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हेल्थ ऑफिसर सचिन मौर्या के अनुसार इन तीनों प्लांट से रोजाना डेढ़ लाख रुपए की इनकम हो रही है. इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट के माध्यम से जोधपुर शहर में 300 लोगों को दिया गया है. बताया जा रहा है कि इस ड्राई वेस्ट से कोल के अलावा प्लास्टिक आइटम भी बन सकते हैं. फिलहाल जोधपुर नगर निगम की ओर से कचरे द्वारा कोल के अलावा अन्य किसी वस्तु को नहीं तैयार किया जा रहा लेकिन मानना है कि इस आरडीएफ से पीवीसी आइटम के साथ ही प्लास्टिक पॉट, बकेट तो बना ही सकते हैं. इसके साथ ही इस कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में भी हो सकता है.

 

Input: indiatimes

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