पिता निजी कंपनी में करते थे काम, कठिन परिस्थितियों के आगे नहीं मानी हार, गांव से पहली महिला IAS अधिकारी बनीं ममता यादव

UPSC 2020 के नतीजे घोषित हो चुके हैं। नतीजों का इंतजार कर रहे कई कैंडिडेट्स को नतीजों से खुशी मिली है तो कई हताश भी हुए हैं। इस बार 545 पुरुष और 216 महिलाओं का चयन हुआ है। इस बात टॉप 5 में लड़कियों ने बाजी मारी है। ममता यादव ने इस बार पांचवी रैंक हासिल की है और इसी के साथ उनके बचपन का सपना पूरा हो गया है। ममता के लिए यूपीएससी में ये कामयाबी पहली नहीं है, वह इससे पहले भी यूपीएससी क्लियर कर चुकी हैं।

 

पिछले साल घोषित हुए नतीजों में उनकी 556 रैंक आई थी। उन्होंने रेलवे कार्मिक सेवा के लिए प्रशिक्षण भी शुरू कर दिया था। लेकिन उन्हें अपने ऊपर विश्वास था, इसलिए उन्होंने एक बार फिर एग्जाम देने का फैसला किया था। ममता ने अपनी कमियों में सुधार किया और एक बार फिर इस परीक्षा के लिए प्रयास किया। ममता के लिए ये फैसला लेना आसान नहीं था। क्योंकि उनके पिता एक निजी कंपनी में काम करते हैं और घर के हालात भी कुछ खास नहीं थे।

 

परिवार के सपोर्ट से पूरा किया सपना: मूल रूप से बसई गांव की रहने वाली ममता यादव का परिवार फिलहाल दिल्ली में ही रह रहा है। उनकी मां सरोज यादव गृहिणी है। ममता ने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश के बलवंत राय मेहता स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी के ‘द हिंदू’ कॉलेज में एडमिशन मिल गया था। ममता शुरुआत से ही पढ़ाई में बहुत होशियार थीं। इसलिए उनका परिवार भी चाहता था कि वह सिविल सर्विस की तैयारी करें।

 

ममता की मां से जब उनकी बेटी की कामयाबी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि ये परिवार के संघर्ष की जीत है। उन्हें भी नहीं पता था कि उनकी बेटी इतनी आगे तक जाएगी। ममता के पिता का कहना है, इसका पूरा श्रेय ममता की मां को जाता है। क्योंकि ममता अपने गांव की पहली लड़की है जो पढ़ाई में इतने आगे तक गई और आज आईएएस बनने जा रही है। ममता की शिक्षा पर हम सभी लोगों ने बचपन से ही बहुत ध्यान दिया था। लेकिन इसमें उसकी मेहनत के बिना ये सब हासिल कर पाना संभव नहीं था।

Input: Daily Bihar

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